संवाददाता समाचार टाउन
कायमगंज/फर्रुखाबाद:पट्टिया लेन, कम्पिल रोड स्थित किरण पब्लिक स्कूल में 25 अगस्त को केरल का प्रसिद्ध सांस्कृतिक उत्सव ‘ओणम’ बड़े ही धूमधाम, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर विद्यालय परिसर में विभिन्न सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा और खेल भावना का शानदार प्रदर्शन किया।

उत्सव के दौरान विद्यार्थियों ने हाउस-वार पारंपरिक फूलों की भव्य रंगोली बनाई, जिसे मलयालम भाषा में ‘पूकलम’ कहा जाता है। बच्चों द्वारा तैयार की गई पूकलम की मनमोहक छटा देखते ही बन रही थी। इसके साथ ही छात्रों के बीच रस्साकशी (टग ऑफ वॉर) और वॉलीबॉल जैसे रोमांचक खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने पूरे जोश के साथ अपनी ऊर्जा और टीम भावना का परिचय दिया। यह भव्य कार्यक्रम विद्यालय की प्रबंधक (मैनेजर) श्रीमती कल्पना गंगवार, प्रधानाचार्या श्रीमती राधिका नायर एवं कोऑर्डिनेटर जयन राजन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालय की प्रबंधक डॉ वीरेंद्र गंगवार, मैनेजर श्रीमती कल्पना गंगवार ने ओणम पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह उत्सव हमें सांस्कृतिक एकता, खुशहाली और आपसी सौहार्द का संदेश देता है। मूल रूप से केरल की रहने वालीं विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती राधिका नायर ने ओणम के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अपनी जड़ों और परंपराओं का सम्मान करने का सशक्त संदेश दिया। वहीं कोऑर्डिनेटर जयन राजन एवं गतिविधि समन्वयक अंजना जयन ने भी ओणम पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपराओं और विशेषताओं को साझा करते हुए कार्यक्रम में विशेष योगदान दिया।

ओणम केरल का सबसे बड़ा और हर्षोल्लास का त्योहार है। यह पर्व मुख्य रूप से असुर राजा महाबली के धरती पर आगमन के स्वागत में मनाया जाता है।पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में केरल पर महाबली का शासन था। असुर होने के बावजूद वे एक अत्यंत न्यायप्रिय, दानवीर और दयालु राजा थे। उनके राज में प्रजा बेहद सुखी और संपन्न थी। महाबली की बढ़ती लोकप्रियता और शक्ति को देखकर स्वर्ग के देवता चिंतित हो गए।देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान विष्णु ने ‘वामन’ (बौने ब्राह्मण) का अवतार लिया और महाबली के पास भिक्षा मांगने पहुंचे। वामन देव ने राजा से ‘तीन पग’ (तीन कदम) जमीन मांगी। महाबली के वचन देते ही वामन देव ने विशाल रूप धारण कर लिया। उन्होंने अपने पहले दो कदमों में ही पूरी धरती और आकाश को नाप लिया। जब वामन देव ने पूछा कि तीसरा कदम कहाँ रखूँ, तो वचन के पक्के महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया।

तीसरा कदम सिर पर रखते ही महाबली पाताल लोक चले गए। भगवान विष्णु उनकी इस दानवीरता से बहुत प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान दिया कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आ सकेंगे।ऐसी मान्यता है कि हर साल ओणम के दिन राजा महाबली अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने आते हैं। अपने प्रिय राजा के भव्य स्वागत के लिए ही लोग घरों को फूलों की रंगोली (पुकलम) से सजाते हैं, पारंपरिक दावत (साध्या) बनाते हैं और यह दर्शाते हैं कि उनकी प्रजा आज भी खुशहाल है।

इस भव्य समारोह के सफल एवं सुचारू आयोजन में गतिविधि प्रभारी विक्रांत सिंह, कला एवं रचनात्मक प्रभारी शिवानी राठौर, आरजू गंगवार व आकांक्षा सैनी, मीडिया प्रभारी हीरा अंसारी, शिक्षक शाहरुख अली, अजमत अली, अतुल प्रताप, हरिद्वार, निखिल, नीरज अग्निहोत्री तथा शिक्षिका अंजू बाथम, आशिका, मंजू, पूजा, पूनम, खुशी,फराह खान, लिपिक उमाकांत वर्मा एवं कंप्यूटर संचालक रवि कुमार का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्या श्रीमती राधिका नायर मैम ने सभी शिक्षकों, अतिथियों व छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए ओणम की बधाई और शुभकामनाएं दीं।

