संवाददाता समाचार टाउन
-साधना निकुंज की संगोष्ठी में तथागत बुद्ध के दर्शन और प्रासंगिकता पर हुई चर्चा
कायमगंज/फर्रुखाबाद:साधना निकुंज की ओर से बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के संदेशों को वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. मिथिलेश अग्रवाल ने कहा कि आज जब दुनिया हिंसा और उन्माद के दौर से गुजर रही है, तब मानवता की रक्षा केवल तथागत बुद्ध के अमृत वचन ही कर सकते हैं। विशिष्ट वक्ता और साहित्यकार प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि बुद्ध सही मायने में भारत-रत्न और विश्व के अनमोल प्रज्ञा पुरुष हैं।
प्रधानाचार्य योगेश तिवारी ने भगवान बुद्ध के शब्दों को चेतना जगाने वाला महामंत्र बताया। वहीं, प्रधानाचार्य शिवकांत शुक्ला व अमरनाथ शुक्ला ने कहा कि बुद्ध का दर्शन प्रज्ञा और करुणा का अद्भुत समन्वय है। पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर ने बुद्ध को वैचारिक क्रांति का अगुआ बताते हुए कहा कि उन्होंने अंधविश्वासों को नकार कर तर्क की राह दिखाई। राजवीर शाक्य एडवोकेट, वीएस तिवारी और हिंदी प्रवक्ता हरिनारायण उपाध्याय ने भारतीय ज्ञान परंपरा में समन्वय और विरोध की स्वीकृति पर जोर दिया।
अनुपम मिश्रा ने कहा सुनकर सम्यक ज्ञान को मानव हुआ प्रबुद्ध, सदा जागते ही रहें हमें तथागत बुद्ध। गोष्ठी में बलवीर सिंह, अभिषेक चतुर्वेदी, संजीव शुक्ला और शिव कुमार दुबे आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट परम मिश्रा द्वारा किया गया।

