संवाददाता समाचार टाउन
-एसडीएम कोर्ट के बाबू का आरोप, आधा दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं ने की थी अभद्रता
कायमगंज:तहसील परिसर में एसडीएम न्यायालय में तैनात अहलमद (फौजदारी) अनुज कुमार ने करीब आधा दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, तोड़फोड़ और बदसलूकी करने का मुकदमा दर्ज कराया है। वहीं, रेवेन्यू बार एसोसिएशन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे कर्मचारियों की साजिश करार दिया है।
पुलिस को दी गई तहरीर में अहलमद अनुज कुमार ने बताया कि सोमवार शाम करीब 4 बजकर 45 मिनट वह न्यायालय में सरकारी कार्य निपटा रहे थे। इसी दौरान आधा दर्जन से अधिक अधिवक्ता वहां पहुंचे और कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज व बदसलूकी शुरू कर दी। आरोप है कि अधिवक्ताओं ने न्यायालय की महत्वपूर्ण पत्रावलियों को भी अस्त-व्यस्त कर दिया। अहलमद का दावा है कि अधिवक्ता सरनेश यादव ने न्यायालय के मुख्य दरवाजे पर जोरदार लात मारी, जिससे उसकी कुंडी टूट गई।घटना के बाद तहसील में हड़कंप मच गया।
पुलिस ने अहलमद की तहरीर पर अधिवक्ता सरनेश यादव, इंद्रेश गंगवार, अवनीश गंगवार उर्फ लालू समेत 5-6अन्य अज्ञात वकीलों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। इधर, मंगलवार को रेवेन्यू बार एसोसिएशन ने बैठक कर मुकदमे की कड़े शब्दों में निंदा की। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि न्यायालय के बाबू ने खुद दरवाजे के ताले पर लात मारकर उसे क्षतिग्रस्त किया और अब अपनी गलती छिपाने के लिए वकीलों पर झूठा दोष मढ़ हुई रहे हैं। वकीलों का कहना है कि वे 17 अप्रैल से ही न्यायिक कार्य से विरत चल रहे हैं।
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वकीलों ने डीएम को भेजा पत्र।
कायमगंज:अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मांग की है कि पूरे प्रकरण की किसी उच्च स्तरीय कमेटी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। वकीलों ने कहा फर्जी मुकदमा वापस लिया जाए।
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एसडीएम बोले, पत्रावलियों में दबाव बनाने की कोशिश।
कायमगंज:उपजिलाधिकारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि मंगलवार को एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार न्यायालय नियमित रूप से संचालित रहे। उन्होंने कहा कि कुछ अधिवक्ता अपनी पत्रावलियों में पक्ष में दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। सोमवार को कुछ वकीलों द्वारा एसडीएम कोर्ट की ओर तोड़फोड़ किए जाने के मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
एसडीएम ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार बिना ठोस कारण के हड़ताल नहीं की जा सकती, ऐसे में न्यायिक कार्य प्रभावित करना नियमों के विपरीत है।

