संवाददाता समाचार टाउन
कायमगंज:विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम की ओर से आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने पर्यावरण की बदहाली पर कड़ा प्रहार किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर रामबाबू मिश्र ‘
रत्नेश ने दो टूक कहा कि भौतिकवाद की अंधी दौड़ में हमने धरती को विनाश की कगार पर खड़ा कर दिया है। हिमनद पिघल रहे, पर्वत दरक रहे। प्रोफेसर रत्नेश ने चेताया कि निरंतर पिघलते हिमनद, वनों की कटान, पर्वतों पर डायनामाइट के धमाके और जहरीली गैसों का उत्सर्जन जलवायु के संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ रहा है। उन्होंने कहा भूजल का बेजा दोहन और आणविक परीक्षणों के कारण ओजोन परत का विस्तार और दक्षिणी ध्रुव पर बढ़ता तापमान भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है।
पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर और आचार्य शिवकांत शुक्ला ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्राकृतिक शक्तियों की पूजा का विधान इसलिए बनाया था ताकि जीवन में शांति और संतुलन बना रहे। लेकिन विकास के नाम पर हमने उन आदर्शों को छोड़ दिया है। वीएस तिवारी और अमरनाथ शुक्ला ने भी विचार रखते हुए कहा कि विकास की वर्तमान रफ्तार दरअसल विनाश का रास्ता तैयार कर रही है। गोष्ठी में कवि यशवर्धन ने अपनी रचना के माध्यम से संदेश दिया धरती का वंदन करो, करो प्रकृति से प्यार, नहीं रहेगा अन्यथा जीवन का आधार। इस दौरान उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और जल बचाने का सामूहिक संकल्प लिया।
