संवाददाता समाचार टाउन
कायमगंज/फर्रुखाबाद:सीपी विद्या निकेतन के नर्सरी विंग द्वारा आयोजित उत्कर्ष कार्यक्रम बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मकता और उत्साह का अनूठा संगम रहा। कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर 1200 से अधिक प्रमाण पत्र बच्चों को वितरित किए गए। कई बच्चों ने दो-दो और तीन-तीन प्रमाण पत्र प्राप्त कर अपनी उपलब्धियों का परिचय दिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे अतिथि ने बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। विशिष्ट अतिथि के रूप में नितिन अग्रवाल एवं मसूद अली खान मौजूद रहे। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों को देखकर उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम की जमकर प्रशंसा की।मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना अत्यंत आवश्यक है। छोटी उम्र में बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलने चाहिए, ताकि उनमें आत्मविश्वास बढ़े और उनकी रचनात्मक क्षमता का विकास हो सके। उन्होंने कहा कि जो बच्चे इस बार प्रमाण पत्र प्राप्त करने से रह गए हैं, उन्हें भी भविष्य में किसी न किसी कार्यक्रम में प्रतिभाग करने का अवसर दिलाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे सभी बच्चों को उनकी भागीदारी के लिए प्रमाण पत्र मिल सके।

उन्होंने कहा कि इतने छोटे बच्चों की इतनी सुंदर और प्रभावशाली प्रस्तुतियां उन्होंने पहले नहीं देखीं। नन्हे-मुन्ने बच्चों का मन कोरे कागज के समान होता है। इस उम्र में उन्हें जो संस्कार, शिक्षा और अनुभव मिलते हैं, उनका प्रभाव जीवनभर बना रहता है।
मोबाइल की दुनिया में बचपन की खुशियां न छीनें
मुख्य अतिथि ने आज के मोबाइल युग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को दादी-नानी की कहानियों, खुले मैदान में दौड़ने, पड़ोस के बच्चों के साथ खेलने और आपसी मेलजोल के अवसर मिलने चाहिए। आज बच्चों को बाहर खेलने देने के बजाय उनके हाथों में मोबाइल थमा दिया जाता है, जिससे उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहले घरों में मां बच्चों को अक्षरों और मात्राओं का ज्ञान कराती थीं। होमवर्क पूरा करने के बाद बच्चे दिनभर दूसरे बच्चों के साथ खेलते थे, जिससे उनका शारीरिक और सामाजिक विकास होता था। इसके विपरीत आज के बच्चे किताबों के बोझ और अंकों की होड़ के दबाव में रहते हैं। बच्चों को केवल अच्छे अंक लाने की दौड़ में शामिल करने के बजाय उनकी रुचि, प्रतिभा और बचपन की खुशियों का भी ध्यान रखना चाहिए।उन्होंने भावपूर्ण पंक्तियों के माध्यम से बच्चों को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने का अवसर देने का संदेश दिया—
इन नन्हे-मुन्ने बच्चों को,
तुम चांद-सितारे छूने दो।
दो-चार किताबें पढ़कर,
यह हम जैसे हो जाएंगे।
कार्यक्रम में नितिन अग्रवाल, मसूद अली खान, प्रधानाचार्य आरके वाजपेयी एवं उपप्रधानाचार्य दीपक जैना ने भी बच्चों को संबोधित कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में अभिभावक और विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान और अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों की प्रतिभा को निखारना, उनमें आत्मविश्वास पैदा करना और उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना भी है।

